मैं अकेला मैं अकिंचन

Wednesday, December 2, 2009

मैं अकेला मैं अकिंचन
जटिल बंधन में बंधा भी
मुक्ति के मैं गीत गाता
वेदनाएं झेल कर भी
मौन रहता मुस्कराता
यह विवशता है कि नियमन मैं
अकेला मैं अकिंचन
गोल क्षिति कि परिधि
पर चल
क्षितिज पाना चाहता हूँ
और मृग जल से पिपासा
तृप्त करना चाहता हूँ
काम्य का ही सतत चिंतन
मैं अकेला मैं अकिंचन
जल पिया कितना मगर
यह प्यास तो जाती नहीं है
पथ चला कितना मगर
मंजिल नज़र आती नहीं है
सतत संग्रह सतत तर्पण
मैं अकेला मैं अकिंचन
है वही आदर्श जिस तक पहुँच
अपनी हों पाती
धरा भी रवि के चतुर्दिक
घूमती पर छू पाती
सतत गति ही जगत जीवन
मैं अकेला मैं अकिंचन

जगन्नाथ त्रिपाठी

9 comments:

गिरिजेश राव December 11, 2009 at 6:13 AM  

उत्तम, सतत और प्रवाहशील ब्लॉगरी के लिए शुभकामनाएँ।

ब्लॉग शीर्षक तो अर्थगुरु है! वाह।

परमजीत बाली December 11, 2009 at 8:51 AM  

बहुत सुन्दर रचना है।बधाई स्वीकारें।

अजय कुमार December 11, 2009 at 8:10 PM  

हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी टिप्पणियां दें

कृपया वर्ड-वेरिफिकेशन हटा लीजिये
वर्ड वेरीफिकेशन हटाने के लिए:
डैशबोर्ड>सेटिंग्स>कमेन्टस>Show word verification for comments?>
इसमें ’नो’ का विकल्प चुन लें..बस हो गया..कितना सरल है न हटाना
और उतना ही मुश्किल-इसे भरना!! यकीन मानिये

dweepanter December 12, 2009 at 4:12 AM  

बहुत सुंदर रचना
हिंदी ब्लाग जगत में आपका स्वागत है।
pls visit...
www.dweepanter.blogspot.com

shama December 12, 2009 at 9:08 AM  

Blog ke naam ne ek Gulzaar kaa geet yaad dila diya,"hamne dekhi hai un aankhon kee mahaktee khushbu"!
Tahe dilse swagat hai!

http://kavitasbyshama.blogspot.com

http://shamasansmaran.blogspot.com

kshama December 12, 2009 at 9:22 AM  

Utkrusht rachnase shuruaat...anek shubhkamnayen!

Sonal August 9, 2010 at 11:40 PM  

bahut sundar rachna....
Meri Nai Kavita padne ke liye jaroor aaye..
aapke comments ke intzaar mein...

A Silent Silence : Khaamosh si ik Pyaas

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नाम : जगन्नाथ त्रिपाठी

जन्म : ११.२.1930

ग्राम : भदसा मानवपुर, जनपथ मऊ उत्तर प्रदेश

वृत्ति : वन सेवा से सेवा निवृत्ति १९९०

अभिरुचि : भाषा शास्त्र, काव्य, प्राचीन इतिहास, पुरातत्व विभाग, वानिकी, पर्यावरण

संपर्क - ५५ पन्त नगर गोंडा (उ ० प्र ०) २७१००१
कृतित्व -प्रकाशित :-
१-मधुयामा का स्वप्न (प्रथम संस्करण १९९६ दिसंबर २००१)शेक्सपियर कृत "a mid summer nights dream"का पद्यबद्ध हिंदी अनुवाद
(भूमिका अमरनाथ झा )
२-यह आपको जहाँ तक भाये (२००१)शेक्सपियर कृत as you like it ka पद्य बद्ध हिंदी अनुवाद
३- शिकवा जवाबे शिकवा का पद्य बद्ध हिंदी अनुवाद
४ -उमर खय्याम क रुबाई का (२००६)उमर खय्याम की रुबाईयों का भोजपुरी पद्यानुवाद
५-क्षितिज छूना चाहता हूँ (२००९)काव्य संकलन
६-वांग्मय विमर्श (२००९)लेखों का संग्रह
प्रकाश्य :-
१- प्रसाद कृत आंसू का भोजपुरी अनुवाद

२- शेक्सपियर कृत ट्वेल्थ नाईट का पद्यबद्ध हिंदी अनुवाद
संपादन -पलाश -साहित्यिक पत्रिका गोंडा

२- भोजपुरी बयार गोंडा के अंगना में

३- भोजपुरी -हिंदी-अंग्रेजी शब्दकोष (निर्माणाधीन )
गीतों के केसेट वन एवं पर्यावरण सम्बन्धी आकाशवाणी लखनऊ को वन विभाग द्वारा प्रदत्त !

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